उतरौला में जनसेवा का मजबूत चेहरा बनकर उभरे राधेश्याम वर्मा, समाजसेवा से बनाई लोगों के दिलों में पहचान
बलरामपुर। राजनीति में पहचान केवल पद और चुनाव से नहीं बनती, बल्कि जनता के सुख-दुख में लगातार खड़े रहने, जरूरतमंदों की मदद करने और समाज के बीच रहकर काम करने से बनती है। 293-विधानसभा उतरौला में ऐसी ही एक पहचान के रूप में राधेश्याम वर्मा का नाम तेजी से सामने आया है। स्वास्थ्य सेवा से लेकर शिक्षा, रोजगार, धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों और गरीब-असहाय परिवारों की सहायता तक उनकी सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी और लोकप्रिय जननेताओं में अलग पहचान दिलाई है।
करीब एक दशक से उतरौला विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय राधेश्याम वर्मा ने राजनीति को केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए इसे जनसेवा से जोड़ने का प्रयास किया है। उनका मूल मंत्र “नर सेवा-नारायण सेवा” रहा है। इसी सोच के साथ वे समाज के हर वर्ग तक पहुंचने और जरूरत के समय लोगों के साथ खड़े होने को प्राथमिकता देते रहे हैं।
हर रविवार निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा, 2018 से लगातार जारी अभियान
राधेश्याम वर्मा के सामाजिक कार्यों में सबसे उल्लेखनीय पहल स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में दिखाई देती है। आरएसवी सेवा ट्रस्ट और आरएसवी हॉस्पिटल के माध्यम से वर्ष 2018 से प्रत्येक रविवार निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
इन शिविरों के माध्यम से सामान्य और जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श, उपचार तथा शुगर जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही है।
राधेश्याम वर्मा का मानना है कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण किसी जरूरतमंद व्यक्ति को इलाज से वंचित नहीं होना चाहिए। इसी सोच के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को समाजसेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया गया।
गरीब, किसान, युवा और जरूरतमंद परिवारों से सीधा जुड़ाव
उतरौला विधानसभा के गांवों और कस्बों में राधेश्याम वर्मा की सक्रियता केवल राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रही है। क्षेत्र में विवाह, सामाजिक कार्यक्रम, सुख-दुख और जरूरत के अवसरों पर लोगों के बीच उनकी मौजूदगी लगातार देखने को मिलती रही है।
सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोगों के पारिवारिक एवं वैवाहिक आयोजनों में बिना भेदभाव शामिल होना तथा जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह में यथासंभव सहायता करना उनकी सामाजिक कार्यशैली का हिस्सा रहा है।
मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग, युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करना तथा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन में मदद करना भी उनके सामाजिक प्रयासों में शामिल रहा है।
यही कारण है कि उनकी राजनीतिक पहचान के साथ-साथ एक समाजसेवी और जनता के बीच उपलब्ध रहने वाले जननेता की छवि भी मजबूत हुई है।
कोरोना संकट में जरूरतमंदों के लिए बढ़ाए मदद के हाथ
कोविड महामारी का दौर देश और समाज के लिए बेहद कठिन समय था। इस दौरान राधेश्याम वर्मा द्वारा उतरौला क्षेत्र में स्वास्थ्य और राहत से जुड़े कई प्रयास किए गए।
आपात परिस्थितियों को देखते हुए आईसीयू एम्बुलेंस की व्यवस्था, मास्क और सैनिटाइजर का वितरण तथा क्वारंटीन और आवास की समस्या से जूझ रहे प्रवासी नागरिकों के लिए रहने और खाद्य सामग्री की व्यवस्था जैसे कार्य किए गए।
इसके साथ ही सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से निःशुल्क ऑनलाइन सेवाओं और जनजागरूकता के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की सहायता करने का प्रयास किया गया।
संकट के समय किए गए ऐसे कार्यों ने जनता के साथ उनके सामाजिक रिश्ते को और मजबूत किया।
धर्म और संस्कृति से गहरा जुड़ाव
राधेश्याम वर्मा सामाजिक सेवा के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनका मानना है कि किसी क्षेत्र का विकास केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत भी मजबूत होनी चाहिए।
उतरौला क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले नवरात्रि एवं दुर्गापूजा कार्यक्रमों में सहयोग, विभिन्न पूजा पंडालों में सहभागिता, बड़े मंगलवार पर श्री हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद विशाल भंडारे का आयोजन और महाप्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम उनकी धार्मिक-सामाजिक सक्रियता का हिस्सा रहे हैं।
छठ पूजा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं में सहयोग तथा विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता भी लगातार देखने को मिलती रही है।
इसके साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महापुरुषों की जयंती से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया गया है।
स्वच्छता और खेल के माध्यम से युवाओं को जोड़ने की पहल
राधेश्याम वर्मा ने युवाओं को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया है। क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने तथा युवाओं को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया गया।
बच्चों और युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में सहयोग तथा आयोजन में सहायता भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रही है।
उनकी सोच है कि स्वस्थ और मजबूत युवा ही किसी क्षेत्र के बेहतर भविष्य की नींव बन सकते हैं।
मुंबई से उतरौला तक लंबा राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव
राधेश्याम वर्मा का राजनीतिक सफर उतरौला तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने लंबे समय तक मुंबई में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहकर संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं। वे जिला स्तर पर पदाधिकारी रहने के साथ उत्तर भारतीय मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
वर्तमान में वे जिला कार्यकारिणी सदस्य के रूप में सक्रिय हैं। इसके साथ ही नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन (NMO) में जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में दक्षिण मध्य मुंबई लोकसभा क्षेत्र में चुनावी गतिविधियों में सक्रिय योगदान देने के साथ उसी वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सायन-कोलीवाड़ा क्षेत्र में पार्टी के चुनाव अभियान में भी उन्होंने भूमिका निभाई।
वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरौला विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में संगठनात्मक और चुनावी गतिविधियों में सक्रिय रहे। मुंबई में रह रहे उतरौला क्षेत्र के मतदाताओं को मतदान के लिए अपने गृह क्षेत्र आने हेतु प्रेरित करने और कई लोगों की यात्रा व्यवस्था में व्यक्तिगत सहयोग करने का उल्लेख भी उनके राजनीतिक सफर में मिलता है।
2019 के लोकसभा चुनाव में गोंडा लोकसभा क्षेत्र तथा 2024 के आम चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
पिछले करीब 10 वर्षों से उतरौला विधानसभा में पार्टी की विभिन्न गतिविधियों और संगठन विस्तार में लगातार सहभागिता उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को दर्शाती है।
रोजगार सृजन को भी बनाया जनसेवा का माध्यम
वर्ष 2015 के आसपास अपने गृह जनपद बलरामपुर की ओर स्थायी रूप से सक्रियता बढ़ाने के बाद राधेश्याम वर्मा ने सामाजिक सेवा के साथ रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी ध्यान दिया।
क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ब्रिकफील्ड और व्यावसायिक खेती जैसे कार्यों की शुरुआत की गई। इसके अतिरिक्त रियल एस्टेट, हॉस्पिटल, होटल और मैरिज हॉल जैसे क्षेत्रों में उनकी व्यावसायिक गतिविधियां भी स्थानीय रोजगार से जुड़ी हुई हैं।
उनका मानना है कि क्षेत्र के युवाओं को अपने ही जिले और विधानसभा में सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध हों, तभी वास्तविक विकास संभव है।
जनता के बीच रहकर राजनीति करने पर जोर
राधेश्याम वर्मा की राजनीतिक कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पक्ष जनता के साथ सीधा संवाद है। क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों की समस्याओं में सहभागी बनना, सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों को जागरूक करना और उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सहयोग करना उनकी सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा रहा है।
उनकी कोशिश राजनीति को केवल चुनाव के समय होने वाले संपर्क तक सीमित न रखकर वर्षभर जनता के बीच मौजूद रहने की रही है।
यही निरंतरता उन्हें उतरौला विधानसभा में एक ऐसे चेहरे के रूप में स्थापित करती दिखाई देती है, जिसकी पहचान राजनीति से पहले समाजसेवा और जनसरोकार से जुड़ी है।
उतरौला के भविष्य को लेकर बड़ी योजनाएं
राधेश्याम वर्मा की भविष्य की योजनाओं में शिक्षा, रोजगार, गौसंरक्षण, खेल और सांस्कृतिक विरासत को विशेष स्थान दिया गया है।
उनकी प्राथमिकताओं में समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी विश्वास और भाईचारा मजबूत करते हुए बुनियादी विकास के ढांचे को बेहतर बनाना शामिल है।
युवाओं को हुनरमंद और तकनीकी शिक्षा से जोड़कर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की योजना पर भी उनका विशेष जोर है।
बालिकाओं की उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज, महाविद्यालय और आधुनिक तकनीकी शिक्षण संस्थान स्थापित करने की सोच के साथ वे चाहते हैं कि क्षेत्र की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।
इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से खेल प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना तथा करीब 20 एकड़ क्षेत्र में गौशाला निर्माण की परिकल्पना भी उनकी भविष्य की योजनाओं का हिस्सा है।
प्राचीन धार्मिक स्थलों, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय धरोहरों के संरक्षण तथा विकास को भी वे उतरौला की पहचान और पर्यटन की संभावनाओं से जोड़कर देखते हैं।
समाजसेवा से बनी पहचान, लगातार बढ़ता जनसंपर्क
करीब एक दशक से उतरौला में लगातार सक्रियता, वर्षों का राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव, निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा, गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता, धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता और युवाओं के लिए शिक्षा व रोजगार की सोच—ये सभी पहलू राधेश्याम वर्मा की सार्वजनिक पहचान को मजबूत बनाते हैं।
2 मई 1975 को जन्मे, स्नातक शिक्षित राधेश्याम वर्मा, स्वर्गीय नहीं बल्कि श्री राम सज्जन वर्मा के पुत्र, महमूदाबाद ग्रांट क्षेत्र से जुड़े हैं और वर्तमान में उतरौला को ही अपनी सामाजिक एवं राजनीतिक कर्मभूमि बनाकर सक्रिय हैं।
उनकी सबसे बड़ी ताकत जनता के बीच निरंतर मौजूदगी और सेवा के माध्यम से संबंध बनाने की कार्यशैली मानी जा सकती है। स्वास्थ्य शिविर हो, गरीब परिवार की सहायता, धार्मिक आयोजन, युवाओं को प्रोत्साहन या संगठनात्मक जिम्मेदारी—हर क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी ने उनकी पहचान को व्यापक बनाया है।
आज 293-विधानसभा उतरौला में राधेश्याम वर्मा का नाम एक ऐसे सक्रिय समाजसेवी और लोकप्रिय जननेता के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है, जो विकास की राजनीति को सेवा, सामाजिक समरसता और जनता से सीधे जुड़ाव के साथ आगे बढ़ाने की बात करते हैं।
उनकी कार्यशैली का संदेश स्पष्ट है—
“पद से पहले सेवा, राजनीति से पहले समाज और सबसे ऊपर जनता का विश्वास।”
और इसी सोच के साथ उनका संकल्प है—
“नर सेवा ही नारायण सेवा।”
293 विधानसभा उतरौला में राधेश्याम वर्मा समाजसेवा, निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, गरीबों की सहायता, धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लंबे राजनीतिक अनुभव के जरिए एक लोकप्रिय जननेता के रूप में मजबूत पहचान बना रहे हैं।


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